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रविवार, 26 सितंबर 2010

कंजूस-मक्खीचूस

कंजूस-मक्खीचूस

सेठ मक्खीचंद मृत्युशैय्या पर थे.  उन्होंने अपने बेटे करमकीट को बुला करा कहा, "बेटा अब मेरी जिन्दगी का कोई ठिकाना नहीं. यह पांच रूपये लो और झट से बाजार से एक माला ले आओ."

image011 करमकीट, "मगर बाबू जी.... ?"

सेठ मक्खीचंद, "अरे ! अगर मगर क्या ? फट से ले आ और मेरे गले में डाल कर एक फोटो ले ले.... वरना कहीं पहले मर गया तो हर साल एक माला चढ़ाना पड़ेगा... !!”

29 टिप्‍पणियां:

  1. दूरदृष्टि इसे कहते हैं

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  2. आईडिया!!!!!!. और....फूलों को मुर्झाने का डर भी नहीं रहेगा.

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  3. काफी कंजूस बाप है जो आगे तक की सोच रहा है .... हा हा ह

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  4. प्राण जाए, पर नकद न जाए ..

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  5. yeh kanjus to lakkhi mal aur karori mal sai bhee jayada kanjoos nikala

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  6. साला मरने वाला है और कंजूसी छोड़ी नहीं जाती।

    आपके किरदार अच्छे हैं।

    मेरे ब्लॉग पर भी आयें... मुझे अच्छा लगेगा।
    http://tikhatadka.blogspot.com/

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  7. इसे कहते है एक महान कंजूस..बढ़िया मजेदार रचना..बधाई.

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  8. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (27/9/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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  9. हा,,,हा,,,हा,,,हा,,हा,,हा,,हा,,हा
    बहुत खूब
    क्या आईटम है :)

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  10. लगता है कंजूसी के 101 नुस्ख़े इन्हीं की लिखी हुई है!!

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  11. वाह! क्या आईडिया है! ज़बरदस्त लगा !आखिर बीमार आदमी ने दूर की सोच ली!

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  12. .
    .
    .
    हा हा हा हा,

    आपने यह तो बताया नहीं कि करमकीट ने जब फोटो खींची तो सेठ जी के सामने एक मोटी सी धूपबत्ती भी जला दी... मक्खीचंद के मरने के बाद न कभी फोटो माला पहनाने की जरूरत रही न आगे धूप जलाने की!


    ...

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  13. हाहाहाहहा सही है अपनी आने वाली पुश्तों की भी सोच ली सेठ जी ने

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  14. कंजूस तो कंजूस मगर बेटे से कितना प्यार करता है!
    ..मजेदार।

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  15. मरते समय भी अपने बेटे के बारे में ही सोच रहा है....
    हल्की-फुल्की बात में बड़ी बात छुपी है ।

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