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सोमवार, 20 सितंबर 2010

परवाह

परवाह

[Image.jpg]फुलमतिया जी खदेरन में आए व्यवहार परिवर्तन से मन ही मन दुखी थीं। पर वो बोलने में संकोच कर रही थीं। उन्हें उसका रूखा-रूखा व्यवहार हरदम सालता रहता था। जब मामला हद से गुज़रने लगा तो एक दिन बोल ही पड़ीं, “क्या तुम मुझे प्यार करते हो?”


[Copy2.jpg]खदेरन पहले तो इस प्रश्‍न से चौंका, फिर बिना कोई पंगा लिए बोला, “हां!”

 

फुलमतिया जी उसके इस उत्तर से असंतुष्ट हो रूठे स्वर में बोलीं, “लेकिन तुम्हें तो मेरी कोई परवाह ही नहीं है।”

खदेरन तपाक से बोला, “ओए जानेमन! प्यार करनेवाले किसी की परवाह नहीं करते!”

21 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है खदेरन की. खदेड़ कर रख दिया. बुहत बढ़िया.

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  2. भगवान बचाए ऐसे प्रेमी प्रेमिका से

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  3. हा हा!! बहुत सही जवाब दिया है खदेरन ने ..

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  4. :-)

    वाकई प्यार करनेवाले किसी की परवाह नहीं करते! ;-)

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  5. बहुत बढियां......इसे कहते हैं हाजिर जवाबी ,,,,,,,ही ही ही.............

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  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    समझ का फेर, राजभाषा हिन्दी पर संगीता स्वरूप की लघुकथा, पधारें

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  8. हा हा सच है ... उनकी भी नही जिससे प्यार हो ...

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  9. बहूत खूब ...........
    पर प्यार करने वाले को अपने प्यार की परवाह तो करनी चाहिए । फूलमतिया का तो दिल टूट गया होगा, खदेरन को ऐसा नहीं कहना चाहिए :-)

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  10. खदेरन तपाक से बोला, “ओए जानेमन! प्यार करनेवाले किसी की परवाह नहीं करते!”
    हा हा हा……………सही तो कहा…………………मज़ा आ गया जवाब सुनकर्।

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