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रविवार, 19 सितंबर 2010

तेज़ आवाज़ में

28gyofq_th.jpgखुलकर हंसने और हंसकर आस-पास का वातवरण प्रसन्न रखनेवाले व्यक्ति का वृद्धत्व आने पर भी स्वास्थ्य व सौंदर्य बना रहता है।  2my1auc_th.jpg

तेज़ आवाज़ में

खदेरन फुलमतिया - Copy - Copy उस दिन भगावन, खदेरन का बेटा, बहुत ज़ोर-ज़ोर से अपनी मम्मी से बात कर रहा था। खदेरन ने उसे अपने पास बुलाया और कहा, “क्या भगावन, आज फिर तू ने मम्मी से तेज़ आवाज़ में बात की?”


भगावन भी फुलमतिया जी का ही बेटा है, बोला, “मुझे मालूम है डैड, आप मुझसे जलते हैं, क्यूंकि आप ऐसा नहीं कर सकते!”10holmp_th.jpg

23 टिप्‍पणियां:

  1. आख़िर बेटा किस का है.....बहुत बढ़िया.

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  2. जख्म पर नमक नहीं, झंडूबाम लगा गया ये तो .. !

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  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    कहानी ऐसे बनीं–, राजभाषा हिन्दी पर करण समस्तीपुरी की प्रस्तुति, पधारें

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  4. हा हा!! डैडी आजतक हिम्मत नहीं जुटा पाये तो जलेंगे ही न!

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  5. हा-हा-हा
    मज़ेदार
    कहानी घर घर के घरारे की

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  6. हा हा ...क्या बात कही है ...बहुत बढ़िया

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  7. hahaha...
    bahut khub....
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    मेरे ब्लॉग पर इस मौसम में भी पतझड़ ..
    जरूर आएँ...

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  8. क्या खूब कहा.....हर घर का सच या. यूँ कहिये मेरे घर का सच

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  9. खदेरन तो कमाल है कैसी कैसी पोल खोल कर रख देता है

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  10. ही ही ही क्या बात है ......बहुत हे बढ़िया ..

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