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शनिवार, 18 सितंबर 2010

इतनी दूर

इतनी दूर

भगावन स्कूल में था। उसकी शिक्षिका ने कहा, “बच्‍चों कल सूरज पर एक लेक्‍चर होगा, तुम सबको ज़रूर आना होगा।”

सारे बच्चे तो चुप रहे पर भगावन ने बड़े मासूमियत से जवाब दिया, “ मैडम! मैं नहीं आ सकूँगा। मेरी मम्‍मी मुझे इतनी दूर नहीं जाने देगी।”

21 टिप्‍पणियां:

  1. भगावन पढ़ा लिखा है जानता है कि सूरज दूर है. मैं तो बचपन में सूरज को पास ही समझता था. भगावन की मम्मी उसे चाँद तक तो जाने ही देगी. शुभकामनाएँ. अच्छी प्रस्तुती.

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  2. आज तो भगावन बहुत भोला बना बैठा है। बहुत मम्मी की बात सुनने वाला ... !
    मज़ेदार!
    हा-हा-हा....
    बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

    फ़ुरसत में … हिन्दी दिवस कुछ तू-तू मैं-मैं, कुछ मन की बातें और दो क्षणिकाएं, मनोज कुमार, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

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  3. भगावन की मासूमियत cute baby bhgaawan ....बहुत ही सुन्दर...

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  4. बहुत खूब

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    यहाँ पधारे - मजदूर

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

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  6. वाह! बहुत खूब! शानदार और मज़ेदार!

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  7. बहुत ही ज़बरदस्त!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! वैसे सुराज के पास जाना है तो दूर ही........ ;-)


    व्यंग्य: युवराज और विपक्ष का नाटक

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  8. थक भी जायेगा उतनी दूर तक जाते.

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  9. chlo bhaayi koi to he jo logon ko hnsaane niklaa khte hen ke aek ajubaa aesa bhi hogaa aankhon men honge aansu or voh tumhen hnsaane ke liyen niklaa bhi hogaa aaj ke zmaane men kisi ko koi hnsaa de to bs vhi to bhgvaan he bhyi vaah aap kaa kaam bhut khub puny kaa kaam he. akhtar khan akela kota rajsthaan

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