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रविवार, 12 सितंबर 2010

स्‍पीड कम करो!

स्‍पीड कम करो!

खदेरन के गांव का खेलावन उससे मिलने शहर आया था।

स्‍टेशन से उसने टैक्‍सी ली। टैक्सी वाला मेन रोड पर आते ही गाड़ी को बहुत ही तेज रफ्तार से चलाने लगा।

खेलावन का डर से हालत खराब हो गया। बोला, “भैया, जरा स्‍पीड कम करो, जरा धीरे गाड़ी चलाओ! मैं बारह बच्‍चों का बाप हूँ!”

टैक्‍सी ड्राइवर बोला, “अपनी स्‍पीड देखी है, जो मेरी स्‍पीड पर ऐतराज़ कर रहे हो?”

32 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

    देसिल बयना – 3"जिसका काम उसी को साजे ! कोई और करे तो डंडा बाजे !!", राजभाषा हिन्दी पर करण समस्तीपुरी की प्रस्तुति, पधारें

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  2. सही जवाब।
    फ़ोटो गज़ब का लगाया है आपने,

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  3. आप सुबह सुबह दिन कितना अच्छा बना देतीं हैं.... पूरा दिन अच्छा गुज़रता है.. ......

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  4. शहरी ड्राइवर ने सटीक बात कही है. 'तेज़ रफ़्तार' ड्राइवर जनसंख्या कम करने में भी मदद करते हैं.

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  5. उसकी स्पीड तो फिर भी नौ महीने की नपी तुली है न भाई .. !

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  6. वाह भई खेलावन ... खिलाड़ी होकर भी डरते हो :)

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  7. हा हा हा ...........बढिया है उसकी स्पीड कम करना ज्यादा जरूरी .......

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  8. खेलावन को स्पीड कम नहीं करनी है उसे तो अब १२ के बाद रुक जाना चाहिए |

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  9. वो स्पीड कम, साहस ज्यादा है

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  10. उसको किसी ने स्पीड कम करने को कहा ही नहीं होगा...हा हा!!

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  11. जितना हँसूँ उतना ही कम - धन्यवाद्

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  12. अरे भई हंसी तो रुक ही नहीं रही है,,

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  13. जितना हँसूँ उतना ही कम - धन्यवाद्!

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  14. हा हा हा ...बहुत सटीक जवाब मिला ..

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  15. हा हा हा हा ........वाह.....कितना हस्हूँ..:)))))))

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