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शनिवार, 11 सितंबर 2010

क्या बकते हो?

:: हंसने से हम मन की शक्ति का अधिक से अधिक प्रयोग कर पाते हैं। ::

क्या बकते हो?


cartoon भगावन की क्लास टीच गुनगुनिया ने भगावन से पिछले दिनों स्कूल न आने का करण पूछा, “पिछले कई दिनों से तुम स्कूल क्यों नहीं आ रहे थे?”

भगावन ने कहा, “जी मैम, मुझे बर्ड फ़्लू हो गया था।”

गुनगुनिया ने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा, “क्या बकते हो?! ये तो मुर्गी की बीमारी है।”

भगावन ने समझाया, “तो  आपने मुझे इंसान रहने कहां दिया है मैम, रोज़ तो मुझे मुर्गा बनाती हैं।”

20 टिप्‍पणियां:

  1. भगावन की तकलीफ सही नहीं जाती...इसे कोई तो बचाए.

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  2. बात तो सही है, जब एक को मुर्गा बनाया जा रहा है, तो उसका हक़ है की वो दूसरे को उल्लू बना कर हिसाब बराबर कर ले ...

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  3. बहुत-बहुत बधाई!
    --
    ईद और गणेशचतुर्थी की शुभकामनाएँ!

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  4. bhn ji hnsi ki chopaal men aapne jo gr btaaye hen voh bhut bhut dillgi vale dischsp hen men up pr chlne ki koshish krunga shayd meraa svbhaav bhi aapki trh khubsurt hone lge. akhtar khan akela kota rajsthan

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  5. ओह तो इस मुर्गी फ़्लू का कारण ये था ..मैं तो कुछ और ही समझ रहा था :) :) :)

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  6. hmmm,
    school main murga banna, is sabhya samaj ka hissa banne se kuchh mayno main to achha tha

    aise hi sahi...
    koi lauta de wo pyare-pyare din.

    :)

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  7. आपको एवं आपके परिवार को गणेश चतुर्थी की शुभकामनायें ! भगवान श्री गणेश आपको एवं आपके परिवार को सुख-स्मृद्धि प्रदान करें !
    बहुत सुन्दर !

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  8. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

    देसिल बयना – 3"जिसका काम उसी को साजे ! कोई और करे तो डंडा बाजे !!", राजभाषा हिन्दी पर करण समस्तीपुरी की प्रस्तुति, पधारें

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