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मंगलवार, 30 नवंबर 2010

दीपावली पर खदेरन के घर में …

images (6)बीती दीपावली पर फुलमतिया जी मायके गई थीं। भगावन भी साथ में था।

खदेरन घर पर अकेला था। तभी घर के बाहर पुलिस की जीप आकर रुकी और इंस्पेक्टर ने आकर कहा, “हमें खबर मिली है कि आपके घर में विस्फोटक सामग्री है।”

बिना घबराए खदेरन ने कहा, “सर! खबर तो एकदम पक्की है, पर वो अभी मायके गई हुई है।”

सोमवार, 29 नवंबर 2010

आराम की ज़रूरत है

खदेरन अचानक बीमार पड़ गया। बीमारी ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही थी। चिंतित फुलमतिया जी उसे लेकर डॉक्टर के पास गई।

परीक्षण के बाद डॉक्टर उठावन सिंह ने कहा, “आपके पति को आराम की सख्त ज़रूरत है। ये लीजिए नींद की गोलियां।”

फुलमतिया जी ने पूछा, “ये गोलिया इन्हें कब दूं?”

डॉक्टर उठावन सिंह  ने बताया, “ये उनको नहीं देनी है। आपको लेनी है …..”

रविवार, 28 नवंबर 2010

खदेरन ससुराल में …!

इस बार पर्व में खदेरन ससुराल गया।

उसकी सास चम्पई देवी लगातार सात दिनों तक उसे पालक का साग खिलाती रही।

बात आठवें दिन की है।

चम्पई देवी ने खदेरन से पूछा, “दामाद जी! आज क्या खाएंगे आप?”

खदेरन ने जवाब दिया, “सासु मां अब और मेहनत आप क्या करेंगी, ऐसा कीजिए कि खेत ही दिखा दीजिए, मैं खुद ही चर आऊंगा!”

नाम क्या है?

बच्चे जब किसी के सामने जाते हैं तो लोग उनसे कुछ न कुछ पूछते ही रहते हैं।

ऐसा ही भगावन के साथ भी हुआ।

पहली बार जब भगावन को लेकर खदेरन और फुलमतिया जी फाटक बाबू के यहां गए तो फाटक बाबू भगावन को देख कर बड़े खुश हुए और बोले, “अले ले ले … कित्ता प्याला छा बच्चा है!”

फिर खदेरन से पूछे, “अपने बेटे का क्या नाम रखा है?”

खदेरन के बोलने से पहले फुलमतिया जी ने जवाब दिया, “अभी उसका नाम नहीं रखा है, प्यार से उसे भग्गू कहते हैं!”

फाटक बाबू बोले, “बहुत अच्छा है।” फिर भगावन से पूछे, “बेटे आपके पिता जी का क्या नाम है?”

भगावन ने जवाब दिया, “अंकल अभी उनका नाम नहीं रखा है। बस प्यार से पापा-पापा कहता हूं।”

शनिवार, 27 नवंबर 2010

फुलमतिया जी के प्रश्न–खदेरन की परेशानी -२

पिछली बार फुलमतिया जी के प्रश्न का उत्तर न दे सका था खदेरन। तो उसका हौसला बढाने के लिए फुलमतिया जी ने कहा, “कोई बात नहीं अब दूसरे प्रश्न का उत्तर दो। जब फ़र्स्ट फ़्लोर पर बनाया पेट्रोल पम्प नहीं चला, मतलब एक भी ग्राहक नहीं आए तो खखोरन चारों भाइयों ने उसी फ़्लोर पर एक रेस्टोरेंट खोल लिया। पर फिर भी कोई ग्राहक नहीं आया। बोलो क्यों?”

 

images (4)खदेरन माथा खुजाने लगा। उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दे। उसने  हार मान ली तो फुलमतिया जी बोलीं, “वेरी सिम्प्ल! उन्होंने पेट्रोल पम्प का बोर्ड नहीं हटया था .. हा. हा. हा..हा,…..!”

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

आज बस एक चित्र

आज सिर्फ़ एक चित्र…

बताइए इस चित्र का शीर्षक क्या हो? ….

शीर्षक ऐसा हो जिससे हास्य का सृजन हो…

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एक शीर्षक तो मैं ही दे रही हूं …


अब चुराओ तो जानें…!

गुरुवार, 25 नवंबर 2010

बुझावन के प्रश्न बतावन का जवाब-१२

बुझावन :: अच्छा यह बताइए कि लेक्चरर कौन होता है?

 

 

बतावन :: लेक्चरर वह व्यक्ति होता है जो उस समय भी बिना रुके बोलता रहता है जब कोई दूसरा सो रहा हो।

बुधवार, 24 नवंबर 2010

आंसू

कभी-कभार खदेरन भगावन को पढाने बैठ जाता था। अब भगावन तो भगावन है। बाप कोई प्रश्न करे उसके पहले वही प्रश्न कर दे। उस दिन भी ऐसा ही हुआ। भगावन ने पूछा, “ पापा! मां के आंसू और पत्नी के आंसू में क्या फ़र्क़ होता है?”

खदेरन ने जवाब दिया, “बेटा, मां के आंसू दिल पर असर करते हैं और पत्नी के आंसू जेब पर!”

मंगलवार, 23 नवंबर 2010

खुजली है क्या?

फुलमतिया जी मयके गई हुई थीं।

उस दिन फुलमतिया जी के नहीं होने के कारण खदेरन को होटल जाना पड़ा भोजन हेतु। कोने की एक सीट पर जगह लेकर बैठ गया। बेयरा आया और उसके सामने मेनू कार्ड रख कर थोड़ा हट कर खड़ा हो गया। कुछ ही पल बाद खदेरन की नज़र उस पर गई तो देखता है कि वह शरीर के विभिन्न हिस्सों को नोचे जा रहा है। खदेरन ने उसे पास बुलाकर पूछा, “खुजली है क्या …?”

images (5)बेयरा ने अपनी धुन में जवाब दिया, “साहब! मेनू कार्ड देख लीजिए, मेनू में अगर लिखा है तो ज़रूर मिलेगी।”

सोमवार, 22 नवंबर 2010

खांसी जएगी क्या?

फिर जमी थी महफ़िल, यारों की। खदेरन को भी बुलावा था, सो वह भी पहुंच गया। सुबह से उसे काफ़ी खांसी हो रही थी। जब यार-दोस्तो नें पीने का ऑफ़र दिया तो खदेरन ने कहा, “यार मैं नहीं पी पाऊंगा। बहुत खांसी हो रही है।”

सुखारी ने कहा, “ईज़ी यार, सब चला जाएगा?”

खदेरन को यक़ीन नहीं हुआ और बड़े भोलेपन से उसने पूछा, “क्या शराब पीने से खांसी जाती है?”

जलावन सिंह ने बताया, “क्यों नहीं जाएगी? जब मेरा घर, खेत, पैसा,

सब कुछ चला गया तो तेरी खांसी क्या चीज़ है।”

रविवार, 21 नवंबर 2010

फुलमतिया जी के प्रश्न–खदेरन की परेशानी -१

फुलमतिया जी ने खदेरन के आई.क्यू. क्लास ज्वायन करने के कई दिनों के बाद उससे पूछा, “इतने दिन से बुद्धि बढाने वाला स्कूल जा रहे हो कुछ सीखा कि अभी भी अकल पर पर्दा पड़ा ही रहता है?”

खदेरन बोला, “बहुत कुछ सीखा है।”

फुलमतिया जी ने चैलेंज दिया, अच्छा तो हम तुमसे जेनरल नॉलेज वाला प्रश्न पूछें बताओगे?”

खदेरन चहका, “हां-हां, पूछो!”

फुलमतिया जी ने पूछा, “ अच्छा तो बताओ कि खखोरन के तीन भाई थे, बहन नहीं। तो खखोरन के पिता की कितनी औलाद थी?”

खदेरन झट से बोला, “चार!”

फुलमतिया जी बोलीं, “गुड! अब बताओ कि खखोरन और उसके तीनों भाईयों ने मिलकर एक पेट्रोल पम्प खोला। पर उसमें एक भी ग्राहक नहीं आया। बोलो क्यों?”

images (4)खदेरन माथा खुजाने लगा। उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दे। उसने  हार मान ली तो फुलमतिया जी बोलीं, “वेरी सिम्प्ल! पेट्रोल पम्प फ़र्स्ट फ़्लोर पर था .. हा. हा. हा..हा,…..!”

शनिवार, 20 नवंबर 2010

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब!-11

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब!-11

बुझावन : अच्छा ये बताओ दफ़्तरों मे ‘GOOD COMMUNICATION SKILLS ’ वाला किसे कहा जाता है?




बतावन : वेरी सिम्पल! उसे जो SPENDS LOT OF TIME ON PHONE!!!

शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

आज सिर्फ़ एक चित्र

आज सिर्फ़ एक चित्र

बताइए इस चित्र का शीर्षक क्या हो? …. शीर्षक ऐसा हो जिससे हास्य का सृजन हो…
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एक शीर्षक तो मैं ही दे रही हूं …

ऐण्ड दैट वाज़ अ ब्यूटीफुल शॉट! जस्ट ऑन टार्गेट!!

गुरुवार, 18 नवंबर 2010

घटी उम्र

खदेरन फुलमतिया जी के बहुत बोलने से परेशान रहता था।
और फुलमतिया जी जो खुद को कम उम्र खदेरन को बुजुर्ग समझती थी, आजकल फ़ास्ट से सु्पर फ़ास्ट हो गई थीं।
खदेरन इसका उपाय ढूंढ रहा था, पर कुछ हाथ ही नहीं लग रहा था।
एक दिन अखबार के एक आलेख पर उसकी नज़र गई।
पढकर फुलमतिया जी से बोला, “अजी सुनती हैं, डॉक्टरों का कहना है कि ज़्यादा बोलने से इंसान की उम्र कम हो जाती है।”
फुलमतिया जी चहकीं, “आब तो तुम्हें यक़ीन हो गया न कि मेरी उम्र ४० से घट कर २० हो गई है।”

बुधवार, 17 नवंबर 2010

कबाड़ी

एक बार फुलमतिया जी और खदेरन एक रेस्तरां में बैठे खाना खा रहे थे।

खाने के बीच में फुलमतिया जी बोलीं, “देखो, उधर कोने वाली कुर्सी पर बैठा आदमी तुम्हें घूर रहा है।’

खदेरन बोला, “तो उसे घूरने दो ना।”

फुलमतिया जी बोलीं, “मैं उसे जानती हूं।”

खदेरन, “अच्छा! कौन है?”

फुलमतिया जी, “कबड़ी है। हमेशा बेकार की चीज़ों मे दिलचस्पी लेता है।”

मंगलवार, 16 नवंबर 2010

बात-चीत

अब फाटक बाबू क्यों नहीं परेशान हों खंजन देवी से। ज़रा दोनों की बात-चीत सुनिए….

“डिनर पर बाहर चलें?”

“हां”

“क्या खाओगी?”

“कुछ भी।”

“चाइनीज़?”

“नहीं, मुझे गैस हो जाता है।”

“साउथ इंडियन?”

“क्या फाटक बाबू परसों ही तो खाए थे।”

“तो .. फिर … नॉन भेज?”

“अभी छठ के समय, आप भी न … पर्व त्योहार का भी ख्याल नहीं रखते।”

“तो रोटी-तड़का?”

“वही बोरिंग खाना…।”

“तो फिर तुम्ही बताओ…क्या खाना है?”

“कुछ भी।”

सोमवार, 15 नवंबर 2010

दूसरा उदाहरण कोई नहीं

एक दिन गार्डेन में बैठा-बैठा खदेरन कुछ याद कर रहा था और मुस्कुरा रहा था। फाटक बाबू ने देखा तो पूछ लिया, “क्या बात है खदेरन? क्या याद आ गया?”

खदेरन बोला, “फाटक बाबू क्या बताएं, शादी के पहले की बात है।

फुलमतिया जी मुझे पसंद आ गईं थीं, तो चले गए उसके घर और फुलमतिया जी के पिता गेंदा सिंह को इंप्रेस करने के चक्कर में उनसे बोलना शुरु कर दिया,

सर जी, मेरे जैसा लड़का आप को चिराग लेकर ढूंढने पर नहीं मिलेगा। न तो मैं शराब पीता हूं, न ही अलब-कल्ब जाता हूं, दफ़्तर से भी सीधा घर आता हूं, आपकी बेटी मेरे साथ बहुत ख़ुश रहेगी।

तो जनते हैं फाटक बाबू फुलमतिया जी के पिता जी ने क्या कहा, उन्होंने कहा, सॉरी खदेरन बाबू, मैं अपनी बेटी की शादी आपसे नहीं कर सकता… अगर आपको दामाद बना लिया तो मेरी बीवी आपका उदाहरण दे-दे कर मेरा जीना मुश्किल कर देगी! हा-हा-हा….

रविवार, 14 नवंबर 2010

खाली पेट

खदेरन को फुलमतिया जी बात बे-बात बुद्धू कहती थीं। खदेरन को भी लगने लगा कि उसका आई.क्यू. कम है। उसने एक कोचिंग क्लास ज्वायन किया जहां आई.क्यू. बढाने के टिप्स दिए जाते थे।

एक दिन कक्षा में सिखाया जा रहा था। प्रशिक्षक ने खदेरन से पूछा तुम खाली पेट कितनी रोटियां खा सकते हो?”

खदेरन ने कहा, “१०!”

इस पर प्रशिक्षक ने उसे समझाया, “ग़लत! जैसे ही तुम एक रोटी खाओगे, तुम्हारा पेट खाली नहीं रहेगा। इसलिए तुम खाली पेट १० रोटियां नहीं खा सकते। समझे?”

“जी समझ गया।” खदेरन आज बहुत खुश था। उसने एक नई जानकारी हासिल की थी। अब जाकर फुलमतिया जी का टेस्ट लेगा।

घर पहुंचकर उसने फुलमतिया जी से पूछा, “तुम खाली पेट कितनी रोटियां खा सकती हो?”

फुलमतिया जी ने कहा, “६ रोटियां।”

यह सुन खदेरन का मुंह उतर गया।

उसे उदास देख फुलमतिया जी ने पूछा, “क्यों क्या हुआ? उदास क्यों हो गए?”

खदेरन उदास स्वर में बोला, “यदि आप १० रोटियां कहतीं, तो मैं आपको ऐसा जवाब देता कि आप मेरी समझदारी पर हैरान रह जातीं!”

शनिवार, 13 नवंबर 2010

इतनी फिक्र मत कीजिए!

इतनी फिक्र मत कीजिए!

अध्‍यापिका ने लेट से पहुंचे भगावन से कहा, “तुम लेट क्‍यों आए भगावन? स्‍कूल तो 7 बजे ही शुरू हो जाता है। फिर इतनी देर क्‍यों की?”

भगावन ने कहा, “मैम! आप मेरी इतनी फिक्र मत किया कीजिए। लोग गलत समझते हैं।”

शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

आज सिर्फ़ एक चित्र

आज सिर्फ़ एक चित्र

बताइए इस चित्र का शीर्षक क्या हो? …. शीर्षक ऐसा हो जिससे हास्य का सृजन हो…
एक शीर्षक तो मैं ही दे रही हूं …
स्माइल प्लीज़!
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गुरुवार, 11 नवंबर 2010

रखवाली

मोहल्ले में चोरी के वारदात बढ गए थे।

कुछ भी सुरक्षित नहीं था।

फुलमतिया को चिंता सता रही थी कि कैसे घर की रखवाली की जाए।

उन्होंने मां से सलाह ली क्या करना चाहिए। उनकी मां चम्पई देवी ने कहा, “वैसे तो खदेरन के रहते तुझे समस्या नहीं होनी चाहिए थी, पर फिर भी तू एक  कुता रख ले, वो घर की रखवाली करेगा।”

फुलमतिया जी के आदेशानुसार खदेरन गया बाज़ार।

उसने दूकानदार से पूछा, “यह कुत्ता तो बहुत सुंदर है, कुछ घर की रखवाली वगैरह भी ठीक से करेगा तो।”

दुकानदार बोला, “जी बहुत अच्छी तरह से, बस जब भी चोर आए, इसे समय पर उठा सेना।”

बुधवार, 10 नवंबर 2010

सीढी

इस दीपावली के अवसर पर खदेरन फुलमतिया जी के घर में साफ-सफाई का कार्यक्रम चल रहा था।

दोनों बाप-बेटा (खदेरन-भगावन) ड्राइंग रूम में लगे थे और फुलमतिया जी रसोई घर में।

तभी फुलमतिया जी को भगावन की घबराई हुई आवाज़ सुनाई दी। “मम्मी, मुझसे सीढी गिर गई है। ज़ल्दी आओ!”

अपने काम में व्यस्त फुलमतिया जी ने कहा, “मुझसे क्यों कह रहे हो, जाकर पापा से कहो, वो सीढी उठा देंगे”।

भगावन कहा, “पापा तो खुद ही पंखे के साथ लटके हैं!”

मंगलवार, 9 नवंबर 2010

तीन गो बुरबक :: सबसे अच्छी परिभाषा

वायरस : गाली की सबसे अच्छी परिभाषा क्या है ?

चतुर : "क्रोध-कालीन मुख से निकलने वाले शब्द अथवा शब्द-समूह जिनके उच्चारण के पश्चात कर्ता के हृदय को शान्ति और कर्म के हृदय मे क्षोभ का अनुभव होता है. "

सोमवार, 8 नवंबर 2010

सौ चूहे खा कर

मास्टर जी ने कक्षा में बच्चों से एक वाक्य में खाली स्थानों को भरने के लिए कहा.

वाक्य था, "सौ चूहे खा कर बिल्ली .............. चली.

बटेसर सबसे पहले सबक पूरा करके पहुंचा. "सौ चूहे खा कर बिल्ली टेढ़ी-मेढ़ी चली.

मास्टरजी ने एक जोड़ का झापर जड़ते हुए पूछा, "बेवक़ूफ़.... ! यही है तुम्हारी पढाई. "सौ चूहे खा कर बिल्ली टेढ़ी-मेढ़ी चली....?"

बटेसर को भी गुस्सा आ गया. बोला, "मास्टर जी वो तो मैं ने आपकी इज्जत रख ली. वरना सौ चूहे खाने के बाद बिल्ली चलने के लायक भी रहेगी क्या.... ?"

रविवार, 7 नवंबर 2010

मौन-धारण

 खदेरन " 'ए फूलमतिया !  अरे कल अपनी शादी का पांचवा वर्षगाँठ है. बोलो, कल क्या करोगी ?"

फूलमतिया : "पांच मिनट का मौन-धारण !"

शनिवार, 6 नवंबर 2010

लड़ाई रोकने के लिए!

लड़ाई रोकने के लिए!

एक दिन भगावन बड़ी तेजी से भागा जा रहा था। उसे यूँ भागता देख उसका दोस्‍त पलटू ने उससे पूछा “भगावन तुम इस तरह क्‍यों भाग रहे हो?”

भगावन ने जबाव दिया, “लड़ाई रोकने के लिए!”

पलटू ने पूछा, “कौन कर रहा है लड़ाई?”

भगावन ने बताया, “मैं और वह लड़का, जो मेरे पीछे भागा आ रहा है।”

शुक्रवार, 5 नवंबर 2010

आज सिर्फ़ एक चित्र…

आज सिर्फ़ एक चित्र…

ये ई-मेल से प्राप्त हुआ। सोचा आपसे शेयर कर लूं।
बताइए इस चित्र का शीर्षक क्या हो? …. शीर्षक ऐसा हो जिससे हास्य का सृजन हो…
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एक शीर्षक तो मैं ही दे रही हूं …

नट्टी मैन…!!

गुरुवार, 4 नवंबर 2010

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब-१२

बुझावान : ये बताइए कि भविष्यवाणी करने वाला ऑक्टोपस कैसे मरा?

 

 बतावन : हर्ट अटैक से!

 

 बुझावान : क्यॊं हुआ हर्ट अटैक?

 

 बतावन : किसी भारतीय ने ऑक्टोपस से पूछ लिया था – कि भारत फुटबॉल वर्ल्डकप कब जीतेगा?

बुधवार, 3 नवंबर 2010

नया चापरासी

आपको पिछले दिनों बताया था न कि एक ज़माने में फाटक बाबू बिज़नेस किया करते थे। और फिर उस

बिज़नेस का तगड़ा अनुभव! उन्हें हुआ था।

बात उन्हीं दिनों की है। उन्होंने अपने पार्टनर दोस्त को कम्पनी का मैनेजर रख लिया था ताकि उसका अनुभव काम आए। अपना दफ़्तर भी बनवा लिया उस प्रतिष्ठान में। एक नए चापरासी भी रख लिया।

उन्होंने नए नियुक्त किए गए चापरासी से कहा, “मैनेजर साहब ने तुम्हें बता दिया है ना कि तुम्हें क्या करना है?”

images (1) चापरासी ने प्रफुल्लित होकर कहा, “हां साहब! उन्होंने मुझे बता दिया है कि जब आपके आने की आवाज़ सुनूं, तो झटपट उन्हें जगा दूं!”

मंगलवार, 2 नवंबर 2010

बे-ईमान लोग

एक दिन फुलमतिया जी खदेरन को शिकायत के स्वर में बोलीं, “दुनिया में कैसे-कैसे बे-ईमान लोग हो गए है?”

खदेरन को कुछ समझ में नहीं आया। पूछा, “क्यों, क्या हुआ?”

फुलमतिया जी बोलीं, “आज सवेरे दूधवाला मुझे खोटा सिक्का दे गया!”

खदेरन बोला, “अरे! यह तो बहुत बुरा किया उसने। दिखाओ ज़रा!”

फुलमतिया जी बोलीं, “अब वह मेरे पास कहां है! मैंने वह सब्ज़ीवाले को दे दिया!!”

सोमवार, 1 नवंबर 2010

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब-११

बुझावान : ये बताइए कि पहली नज़र के प्यार को क्या कहा जाता है?
 
 
बतावन : समय की बचत!