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बुधवार, 7 जुलाई 2010

हे भगवान!

हे भगवान!

फाटक बाबू डायनिंग टेबुल पर बैठे खाना खाने। खंजन देवी ने खाना परोसा। पहला निवाला ही लिया कि गुस्से में फाटक बाबू चीखे, “आज तुमने कैसा खाना बनाया बनाया है, एकदम गोबर जैसा।”

 खंजन देवी अपना सर पीटते हुए बोलीं, “हे भगवान! इस आदमी ने क्या-क्या चखा हुआ है?”

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