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गुरुवार, 29 जुलाई 2010

हर ग़म

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


हंसने से फेफड़ों का एक्सरसाइज़ हो जाता है जो फेफड़ों के लिए लाभदायक होता है।

हर ग़म

उस दिन फिर खदेरन अपने दोस्तों के साथ पी ली। पी क्या ली, जम के पी। जब घर पहुंचा तो फुलमतिया जी को बसमतिया-बसमतिया कह कर बुलाने लगा। फुलमतिया जी के गुस्से की सीमा नहीं रही। चीखीं, “शराब पीने के बाद क्या तुम्हें मेरा नाम भी याद नहीं रहता है?”

खदेरन टुन्न था। और जब लोग नशे में रहते हैं तो झूठ बोल नहीं पाते। खदेरन बोला, “पी लेने के बाद मैं हर ग़म भूल जाता हूं, मेरी जान।”

15 टिप्‍पणियां:

  1. हाहाहाहाहहाहाहाहाहाहहा...........पीने के बाद हर कोई फिर से शेर हो जाता है, और शेर को डर काहे का। हाहाहाहाहाहाहहाहा

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  2. हा हा हा !! आज तो खदेरन गया काम से

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  3. और जिस दिन पत्नी भी अपना गम इसी तरह भूल गयी तो ...हा हा हा ...
    सुन्दर ...!

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  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  5. ha ha ha जब लोग नशे में रहते हैं तो झूठ बोल नहीं पाते। kahi aisa to nahi ki galti se gharwali ko baharwali ke nam se bula liya ho ha ha ha

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  6. Wah,maja aagaya.ek gudgudati hui vyangatmak rachna.ha-ha-ha.
    poonam

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