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शनिवार, 24 जुलाई 2010

दो आंखें बत्तीस दांत

हंसना ज़रूरी है, क्योंकि …

चार्ली चैपलीन कहते थे, ज़िन्दगी में सबसे बेकार दिन वह है जिस दिन आप नहीं हंसे।

दो आंखें बत्तीस दांत


उस दिन खंजन देवी ने दोपहर का भोजन फाटक बाबू को परोसा।

 

पहला निवाला फाटक बाबू के  मुंह के अंदर गया तो यह जुमला बाहर आया, “भगवान ने तुम्हें दो-दो आंखें दी है, दाल से कंकड़ बीन नहीं सकती थीं?”

इतना सुनना था कि खंजन देवी का प्यार उमड़ पड़ा, बोलीं, “भगवान ने तुमको भी तो बत्तीस दांत दिए हैं, तुम चबा नहीं सकते थे?”

16 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा! मजेदार!! नहले पर दहला.

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  2. बेचारा चार्ली..

    जाने कैसे जीया होगा अपनी जिंदगी...

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  3. कहीं मिल गया तो कहेगा...

    तुम्हें भी तो 32 डांट दिए थे....

    चबा नहीं सकते थे........................?????????????????

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  4. फिर खुद नहीं हंस सकेगा...


    रो देगा .....

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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