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गुरुवार, 8 जुलाई 2010

छोड़ दूगा!

छोड़ दूगा!

खदेरन रात को दो बजे गली में घूम रहा था। तभी हवलदार बुझावन सिंह आया और उसे पकड़ लिया।

खदेरन डर के मारे रोने लगा। और बोला, “मैंने कुछ नहीं किया। मुझे छोड़ दो। मैं घर चला जाता हूं। मुझे छोड़ दो।”

हवलदार बुझावन सिंह बोले, “छोड़ दूंगा! छोड़ दूंगा॒॒!! पहले मुझे गली पार करवाओ, डर लग रहा है भाई!!”

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