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रविवार, 18 जुलाई 2010

मेरी ज़िन्दगी..!

हंसना ज़रूरी है,  क्यूंकि …..


उस दिन को बेकार समझो, जिस दिन आप हंसे नहीं।

--- चेम्सफ़ोर्ड


इसलिए …

हंसे, हंसाएं,

दिन अच्छा बनाएं!

मेरी ज़िन्दगी..!

खदेरन की शादी को आज पांच साल हो गए।

जब उसकी नई-नई शादी हुई थी तो उसके घर में पत्नी फुलमतिया जी के साथ उनका मोबाइल फोन भी आया था।

खदेरन ने फुलमतिया जी का नंबर अपने मोबाइल मे सुरक्षित किया और नाम की जगह लिखा मेरी ज़िन्दगी!

जब एक साल बीता शादी के तो उसने नाम की जगह लिखा मेरी पत्नी!! … और सुरक्षित कर लिया।

दो साल जब शादी का हुआ तो नाम की जगह लिखा घर से!!!

तीसरे साल पूरे होने पर लिखा हुक्मरान!!!!

चौथे साल की समाप्ति पर लिखा हिटलर!!!!!

आज उसने, यानी पांच साल पूरा होने पर लिखा है, .. रॉंग नम्बर!!!!!!

7 टिप्‍पणियां:

  1. वक्त वक्त की बात है
    बहुत सुन्दर

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  3. वाह वाह जि बहुत सुंदर लगे . धन्यवाद

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  4. ये तो वो बात हुई, पहले साल चंद्र मुखी, फिर सूर्य मुखी और तीसरा साल आते आते ज्वाला मुखी

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