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मंगलवार, 27 जुलाई 2010

तुम्हारा क्या कहना है?

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि ….


हंसने से मानसिक तनाव में कमी आती है।

तुम्हारा क्या कहना है?


एक दिन शाम के वक़्त फाटक बाबू गार्डेन में आराम चेयर पर आधा बैठे और आधा लेटे चाय की चुस्कियों का मज़ा ले रहे थे। इतने में खंजन देवी आ गईं और उनके बगल में बैठ कर आहें भरने लगीं।

फाटक बाबू को अपने में ही मस्त देख बोलीं, “शादी से पहले तो तुम पड़ोस की छत से कूद कर मुझसे मिलने आते थे। अब तो तुम्हारे दिल में मेरे लिए ज़रा भी प्यार नहीं रहा।” फाटक बाबू को कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करते देख बोलीं, “तुम्हारा क्या कहना है?”

फाटक बाबू ने कहा, “कहना क्या है! अब तो जी चाहता है, उसी छत से नीचे कूद जाऊँ!!”

14 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा!! बहुत दया आ रही है फाटक बाबू पर.

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  3. शुभ-कार्य में विलम्ब क्या फाटक बाबू... ? कल करे सो आज कर... आज करे से अब.... !!! लेकिन एक बात जान लीजिये, 'पाप के लिए प्रायश्चित है लेकिन बेवकूफी के लिए नहीं..! इस बार कूदने से पहले सोच जरूर लीजियेगा... !!! हा... हा... हा... हा.... !!!!!

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  4. वाह री किस्मत. ये छत काहे को बनाई !!!!!!!

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति...
    बेचारे फाटक बाबू...

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  6. छत इस काम भी आती है। आज ही पता चला।

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