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शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2010

आज सिर्फ़ एक चित्र…

आज सिर्फ़ एक चित्र…


बताइए इस चित्र का शीर्षक क्या हो? …. शीर्षक ऐसा हो जिससे हास्य का सृजन हो…
एक शीर्षक तो मैं ही दे रही हूं …
चौपाटी जाएंगे
भेल-पूरी खाएंगे,
अच्छी-अच्छी डौगियों से
नैना लड़ाएंगे….!!

18 टिप्‍पणियां:

  1. दिल मे छुपा के प्यार का तूफ़ान ले चले
    हम आज अपनी मौत का सामान ले चले

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  2. KYA KISMAT HAI MAINE PAEE.
    AAJ CHABHEE JO HATH AAEE............
    HA HA HA HA ......

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  3. jnaab shirshk kaa kyaa khen lekin fir bhi koshish he , aaja meri gaadi men beth jaa .. akhtar khan akela kota rajsthan

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  4. चलानी हो जो कार, गधों से कुत्ते बेहतर,
    जो चलानी सरकार, कुत्तों से, गधे बेहतर ...

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  5. अरे !! यारों मैं तो साहब बन गया
    साहब बन के कैसा तन गया


    :) :)

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  6. आज मैं आगे ज़माना है पीछे!

    बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    बदलते परिवेश में अनुवादकों की भूमिका, मनोज कुमार,की प्रस्तुति राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

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  7. हम तो चले परदेश, हम परदेसी हो गए!

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  8. एगो हमरा भी दअर्ज कर लिया जाए...
    Objects in the mirror are closer than they appear,
    मगर एक भी हाथ में आती नहीं है!

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