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बुधवार, 20 अक्तूबर 2010

जन्म दिन

जन्म दिन

आज है जन्म दिन मेरा
‘खूब धूम मचाएंगे
सखी-सहेलियों को बुलाएंगे
नाचेंगे, गाएंगे’

कल रात
सोच-सोच कर यही सोई थी
पर सुबह जब आंख खुली
तो
फूट-फूट कर खूब रोई थी

क्योंकि
बिस्तर पर जाते ही मैं सो गई
और
एक मीठे और मधुर सपने में खो गई

ख़्वाब में मैंने एक केक खाया था
गुदगुदा कुछ ज़ायका विचित्र पाया था
आंखें जब खुली तो
तकिए का एक कोना कटा पाया था!
आपसे गुज़ारिश है इस नाचीज़ को
कमअक़्ल को
व्यर्थ में
अपनी भावनाएं न दें
जन्मदिन तो हर साल आते ही रहते हैं
फ़ालतू शुभकामनाएं न दें

वरना आपकी होगी
टिप्पणी : जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं
मतलब : (होगा) हुंह, टिप्पणी लेने का एक और नुस्ख़ा!
ये महिलाएं भी लटके झटके खूब जानती है
ब्लॉगसिंधु से टिप्पणियां खूब छानती हैं

न तो मैंने ऊंची-विदेशी शिक्षा पाई
न कोई महात्वाकांक्षा मन में समाई
और
न ही ज़्यादा नाम कमाने की चाहत है
पर आज मन आहत है

मैथिली जैसे उपेक्षित विषय से बीए की पढाई
के बैकग्राउंड से ब्लॉग जगत में आई
हंसने-हसाने की मुहिम चलाई

जो मिला जहां से मिला
जगह-जगह से इकट्ठा किया
हंसने-हंसाने का नुस्खा
सबको बांट दिया
मानती हूं,
इसमें नहीं कुछ मेरा अपना था
पर हंसी हो हर चेहरे पर यह सपना था

बनाया
सजाया
यह “हास्य फ़ुहार”
और .. फिर सोचा
इसका हो कैसे प्रचार
जाने लगी लोगों के घर, द्वार

कुछ तो आता नहीं था
क्या बोलती,
कर न पाती कोई स्तुति
इसलिए कह देती
”बहुत अच्छी प्रस्तुति!”

आप गुणी ब्लॉगरों से गुजारिश है
एक ब्लॉग ऐसा बनाएं
जिसपर टिप्पणी कैसे और क्या करें
बताएं, सिखाएं
जिससे, हम जैसे कमअक्लों को
अक्ल आ जाए
हास्य से छाए न छाए
टिप्पणी से ही नाम कमा जाए!
टिप्पणी से ही नाम कमा जाए!
टिप्पणी से ही नाम कमा जाए!

32 टिप्‍पणियां:

  1. हँसाने वाला व्यक्ति कभी-कभी टीस दे जाता है. आपने यह अच्छा नहीं किया. आप कहती हैं ”बहुत अच्छी प्रस्तुति!” खुशी बाँटने वाले के तीन शब्दों में भी खुशी रहती है.
    जन्मदिन सहित आपका हर दिन खुशियों से भरा रहे. हम आपके ब्लॉग पर लौटते रहेंगे.

    उत्तर देंहटाएं
  2. तकिया नहीं खाना सविता बिटिया. आज केक ही खाना. अच्छा!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. सच कहा...भूषण जी ने...तकिया मत खाना..न ही खदेरन के कान...


    बस, ऐसे ही हँसने हँसाने का बनाये रहो ऊँचा मुकाम...


    खूब बधाई...


    झटकेबाजी नहीं चलेगी..हमें तो केक चाहिये...:)

    उत्तर देंहटाएं
  4. झटकेबाजी नहीं चलेगी..हमें तो केक चाहिये...:)

    उत्तर देंहटाएं
  5. समीर जी की इस नारेबाज़ी में हम सभी शामिल हैं. हमें केक चाहिए...हमें...

    उत्तर देंहटाएं
  6. जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं के लिए मना करना....
    मतलब : (होगा) हुंह, केक न खिलाने का एक और नुस्ख़ा!


    :)


    :)

    उत्तर देंहटाएं
  7. यह क्या समीर जी, सब से ऊपर तो केक ही परोसा गया है, अभी देखा मैंने. आप भी देखिए.

    उत्तर देंहटाएं
  8. तकिये का कोना आपके लिए ...
    केक हमारे लिए ...
    ज्ञान ना इतना भारी हो जाए कि हँसना हँसाना मुहाल हो जाए ..
    बिना किसी अपेक्षा के अपने इस कार्य में लगी रहें ...

    बक़ौल निदा फाज़ली घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूं कर लें किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए ...!

    उत्तर देंहटाएं
  9. bahut achhee... waise sahi kaha aapne, aisa blog banane kee jaroorat hai... but awesomly written...

    उत्तर देंहटाएं
  10. ब्लॉग ओपेन करते ही सबबसे पहले आप का ब्लॉग पढ़ती हु

    ब्लॉग की शुरुआत मुस्कराते हुए करती हु

    और नहीं चाहती कि आप का ब्लॉग कभी बंद हो कम टिप्पणियों को देख कर

    इसलिए एक टिप्पणी हा हा हा जरुर दे जाती हु |

    मै भी हु आप की ही तरह एक आम व्यक्ति

    ज्यादा अक्ल की बात करना तो मुझे भी नहीं आता है

    नोबेल पर दी आप की टिप्पणी आपकी असली सोच बताता है

    दूसरे भले शिकायत करे

    की अपने लतीफो का स्तर बढाइये हसी नहीं आई

    पर हम जैसे लोगों को इसी पर हसी आई

    इन लतीफो को पढ़ कर मुस्कराना ही किसी हसी से कम नहीं है

    हास्य फुहार के ब्लॉग पर ये उदास सी कविता ठीक नहीं है

    छोडिये कि लोग क्या कहते है

    बस अपना काम करते जाइये

    मेरी मानिये तो कविता का एक और ब्लॉग बनाइये

    जन्मदिन पर ढेर सारी बधाई

    और केक तो आपने टेस्टी खिलाई

    उत्तर देंहटाएं
  11. ha ha ha ha ha ha ha ah ah ah ah dekhiye kaise hahaha ahahah ban gaya.......
    many happy returns of the day.......
    aur ha
    ACCHEE PRASTUTI.......... HA HA HA HA HA HA ......

    उत्तर देंहटाएं
  12. ”बहुत अच्छी प्रस्तुति!”..ही ही ही ही ...... आपके ही शब्द ...
    आपका ब्लॉग मुझे तो बहुत पसंद है ....सुबह मै भी आपको ही पढ़ती हूँ
    सबसे पहले ...जन्मदिन बहुत सुभ हो आपके लिए ......मुस्कुराते रहिये ....लिखते रहिये ऐसे ही ...

    उत्तर देंहटाएं
  13. bahut acha laga aapki post ko pad kar ,,

    Mere blog par bhi sawaagat hai aapka.....

    http://asilentsilence.blogspot.com/

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    Music Sunne or Download karne ke liye Visit karein...
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    उत्तर देंहटाएं
  14. जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई !
    मज़ाक मज़ाक में ही सब कुछ कह दिया !

    उत्तर देंहटाएं
  15. आप अपने सपने "हंसी हो हर चेहरे पर यह सपना था" को सार्थक कर रहीं हैं जो बहुत से लोग नहीं कर पाते. जो अपने गुणों को नहीं पहचानता वही गुणी इंसान होता है.
    जन्म दिन की हार्दिक बधाई.

    कुँवर कुसुमेश

    उत्तर देंहटाएं
  16. janmdin par yah udaas si post ? sach hai ki jab man aahat ho jaye to aisa hi kuchh likha jaata hai...
    bahut achchhi prastuti bahut urjawaan hai ..logon ka kya hai ? kuchh to kahenge hi..jinko jo nahi milta usaka malaal to hona hi hai...
    aap to cake khilaao aur khaao ...janmdin ki shubhkaamnayen

    उत्तर देंहटाएं
  17. बहुत ही खूब लिखा है आपने, पर बधाई तो बनती ही है ....।

    उत्तर देंहटाएं
  18. जन्म दिन की शुभकामनाएं।
    केक खाना खिलाना बनता है....!

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  19. चाहे केक खिलाएँ या न खिलाएँ
    लेकिन जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ
    ईश्वर करे आप अपने जीवन में
    जो चाहे वो पाएँ और स्वस्थ जीवन बिताएँ ......................

    उत्तर देंहटाएं
  20. हमारा केक कहाँ है भई...
    जन्म दिन की शुभकामनाएँ !!

    उत्तर देंहटाएं
  21. हा हा हा आज आपकी अच्छी प्रस्तुति आपके लिए और केक हमारे लिए :)

    उत्तर देंहटाएं
  22. बहुत बढ़िया प्रस्तुती! जन्मदिन की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  23. जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  24. दिमाग में खदेरन के सच में एक खायी खुद ही रही है जो जल्द ही परिणाम देगा आपकी इस अर्जी का की जल्दी ही कोई ऐसा ब्लॉग बनाया जायेगा जिसमे टिपण्णी कैसी होनी चाहिए लेकिन ये भी अब जरूर सोचा जायेगा की टिपण्णी कहाँ कहाँ देनी चाहिए...अब जिनके पेट पहले से भरे हैं ..उनके आगे टिपण्णी परोसने का क्या फायेदा ? तो खदेरन जी के आगे ये बिल पास कराते हैं. लेकिन आपको इस जन्म दिन पर उन्हें और हमें एक केक तो खिलाना ही पड़ेगा...आफ्टर आल ये खुशी का मौका है जी...आपको ऐसे कैसे जाने देंगे...आप बेशक तकिये का कोना खा कर खुश हो लीजिए हम तो केक ही खायेंगे...:):):) बढ़िया प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  25. जन्मदिन पर उदासी?
    टिप्पणी की गिनती मत कीजिए।
    हर कोई हर ब्लॉग पर, हर बार टिप्पणी कर नहीं सकता।
    अभी एक सप्ताह पहले ही आपके के ब्लॉग पर पहली बार आया था।
    और फ़िर रोज आ रहा हूँ।
    कभी मुसकुराकर, कभी ठहाका मारकर चला जाता हूँ।
    क्या हुआ यदि हम इस चुटकुले को पहले भी सुन चुके है?
    दुबारा आनंद उठाना मना तो नहीं है।

    आप लगे रहिए और हम लोगों को हंसाते रहिए।
    रोज शाम को कंप्यूटर बन्द करने से पहले आपके यहाँ झाँकने का प्रोग्राम बना लिया है।
    दिन भर का थकान मिटाता हूँ। अन्य ब्लॉगों के गंभीर लेखों को पढने के बाद, आपका यह ब्लॉग menu का आखरी sweet dish है। इसे पढना आसान, और टिप्पणी करना भी आसान।
    आपकी तो स्टैन्डर्ड टिप्पणी है "बहुत अच्छी प्रस्तुति!”
    अजी इसमें सभी तीन शब्द तो अलग है।
    जैसा मैंने पहले भी लिखा था हमारी स्टैन्डर्ड टिप्पणी में एक ही शब्द तीन बार लिखना पढता है।
    "हा हा हा"।
    महिलाए कृपया "ही ही ही" कहें।
    यदी ठहाका मारना हो तो "हो हो हो" लिखिए।
    यदि चुटकुला समझ में नहीं आया तो Hmmm लिखिये।

    Happy Birthday!
    शुभकामनाएं
    जी विश्वनाथ

    उत्तर देंहटाएं
  26. भौजी प्रणाम! अब ई त सरासर नाइंसाफी है.. एक त आपका कबिता झेलना अऊर उसके ऊपर से आदेस ई कि जनमदिन का बधाई भी नहीं.. घबराइए मत,हम केक नहीं कहेंगे खिलाने के लिए.. हम ठहरे साकहारी अऊर आपके केक में अंडा होता है... अऊर तकिया में का होता है पता नहीं.
    ई मामूली सब्जेक्ट वाला बतिया त छोड़िए दीजिए. हियाँ सब मामूली है... कोई प्राणिशास्त्र, कोई चार्टर्ड एकाउण्टेंट, अऊर डेढ दर्जन से बेसी इंजीनियर, हमरे जईसा रसायन सास्त्र अऊर विधि सास्त्र जईसा मामूली बिसय पढकर लैपटॉप के की बोर्ड पर पियानो बजा रहे हैं.
    चलिये जब पियानो बजाइये रहे हैं त एक्केखर्चा में टिप्पनी के साथ साथ हैप्पी बर्थ डे टू यू बजा देते हैं. अईसहीं हँसी बाँटते रहिये.. बहुत जरूरी टॉनिक है इस आभासी जगत में!!

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  27. बहुत ही बढ़िया रचना
    जन्मदिन की ढेरों शुभकामाएं और बधाइयां.

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  28. आप सबों का दिल से आभार, शुक्रिया धन्यवाद। हमें शुभकामना देने के लिए और हमें प्रेरित करने के लिए।

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  29. कविता लिखने का शौक मेरा पुराना था
    लिख लिया बहुत, अब किसी को सुनाना था
    मेरी महान रचनाओं को सुनने को कोइ तैयार न था
    इस भरी दुनिया मे कोइ सच्चा यार न था
    तभी एक मेहमान रुपी श्रोता मेरे घर आया
    मैने उसको सप्रेम बिठा कर चाय नाश्ता कराया
    फिर मौका देख मै अपनी कविताओं का ढेर उठा ले आया
    और मैने उसको बहला फुसला कर पहली कविता सुनाया
    "ढोल बजा ढोल बजा ढोल बजा गाओ रे,
    दिल्ली मे सुई चुभी मथुरा मे घाव रे"
    बहुत सोच कर भी उसको कुछ अर्थ समझ ना आया
    मैने कहा ये शुरुआत है आगे तो सुन भाया
    मै समझा वो शेर है लेकिन निकला वो खरगोश
    पहली ही कविता सुन कर वो हो गया बेहोश
    ढूंढ रहा हूँ अब मै फ़िर से कोइ बहादुर श्रोता
    काश भरी दुनिया मे कोइ सुनने वाला होता

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