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शुक्रवार, 29 अक्तूबर 2010

आज सिर्फ़ एक चित्र…

आज सिर्फ़ एक चित्र…


ये ई-मेल से प्राप्त हुआ। सोचा आपसे शेयर कर लूं।


बताइए इस चित्र का शीर्षक क्या हो? …. शीर्षक ऐसा हो जिससे हास्य का सृजन हो…

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एक शीर्षक तो मैं ही दे रही हूं …

हर फ़िक्र को धुएं से बढाता चला गया…!!

27 टिप्‍पणियां:

  1. दम मारो दम
    सांसें होंगी कम
    बोलोगे सुबह शाम
    हाय राम! हाए राम!!

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  2. साँसों में धुँआ
    मैने तो खोद दिया
    खुद के मौत का कुँआ

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  3. जो पी लिया उसी को मुकद्दर समझ लिया
    और डाक्टरों के बिल को भुलाता चला गया

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  4. bahut sahi khabar ko deta ye chitr...

    Bhushan ji ki baat par hansi aa rahi hai..

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  5. समीरलाल जी की टिप्पणी के अनुसार uninstall का भी विकल्प रखा जाये।

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  6. सिगरेट जलइ के कैंसर हो गया
    सिगरेट में बड़ी आग है।

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  7. हर फिक्र को धुएं में उडाता चला गया

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  8. बहुत अच्छा सन्देश सिगरेट पिने वालो के लिए ...

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  9. Brilliant!
    Anti smoking Lobby वालों को इस का टी वी पर प्रचार करना चाहिए।

    और फ़िर पीने वालों के खिलाफ़ ऐसा ही कुछ सोचा जाए।

    बस ब्लॉग का नशा को रहने दीजिए!

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  10. कृपया नोट करें सीरियसली कि यह सर्वश्रेष्ठ कैम्पेन का पुरस्कार जीतने वाला चित्र आप ने लगाया है.. वर्ष 2002 या 2003 में. शीर्षक पर चुप्पी चलेगी!!

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  11. आप ने भी और दूसरो ने भी अकी अच्छे शीर्षक दिया है | पोस्ट अच्छा लगा |

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  12. पहले जिंदगी में आमंत्रण, फ़िर उसका आप पर नियंत्रण और बाद में ..... मौत का निमंत्रण... सार्थक संदेश. आभार
    सादर,
    डोरोथी.

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