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सोमवार, 11 अक्तूबर 2010

हज़ामत!

हज़ामत!

खदेरन दाढी बनवाने नाई के पास पहुंचा। उसने बात करने की गरज़ से नाई से यों ही पूछ दिया, “तुमने कभी किसी गदहे की हज़ामत बनाई है?”
नाई ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया, “नहीं साहब! आज पहली बार बना रहा हूं”

16 टिप्‍पणियां:

  1. ग़लत क्या कहा....यूँ ही बातें यूँ ही की जाती हैं. बढ़िया :))

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  2. हा हा !! इसे कहते है जैसे को तैसा..

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  3. मज़ेदार। हा-हा-हा......
    बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
    नवरात्र के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

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  4. हज़ामत बनाने वाले क्या मेरे मन में आफ़त समाई!
    तूने मेरी भी हज़ामत बनाई...
    तूने मेरी भी हज़ामत बनाई...!!!

    बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
    नवरात्र के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

    दुर्नामी लहरें, को याद करते हैं वर्ल्ड डिजास्टर रिडक्शन डे पर , मनोज कुमार, “मनोज” पर!

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  5. हा हा!! नाई को भी नया तजुर्बा मिल गया..:)

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